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Saturday, April 13, 2013

गंगा की कल कल सीने में


गंगा की कल कल सीने में
चन्दन सी महक पसीने में
मन में मुरली की मधुर तान
तन पावनता की दिव्य ज्ञान
वाणी में कबीरा की साखी
हांथो में रामायण राखी
मन में गीता का दिव्य ज्ञान
और कर्म योग जीवन विधान
हर पावन रात दिवाली है
माटी की गंध निराली है
जिनका इस माटी से नाता
उनका तन मन नित ये गाता
रत्नाकर ने चरण पखारेSSSSSSSSSSSSSSSssssss
रत्नाकर ने चरण पखारे दिव्य हिमालय माथा है
सारे जग में अजब निराली भारत माँ की गाथा है

अपनी गौरव गाथा है .........

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